امام صادق علیه السلام : اگر من زمان او (حضرت مهدی علیه السلام ) را درک کنم ، در تمام زندگی و حیاتم به او خدمت می کنم.
ज़ूहर के ज़माने के लोगः रसूले ख़ुदा हज़रत मोहम्मद मुसतफ़ा सल्लल्लाहो अलैहे व आलेही वसल्लम की ज़बान से।

ज़ूहर के ज़माने के लोगः रसूले ख़ुदा हज़रत मोहम्मद मुसतफ़ा सल्लल्लाहो अलैहे व आलेही वसल्लम की ज़बान से।

उस ज़माने लोग एक ख़ुदा कि इबादत करेंगे और अहलेबैत अलैहेमुस्सलाम के मक़ाम को पहचानेंगे। इसलिए वह सब नेक और शरीफ़ होंगे। रसूले ख़ुदा हज़रत मोहम्मद मुसतफ़ा सल्लल्लाहो अलैहे व आलेही वसल्लम ने ज़हूर के ज़माने के लोगों को चौदहवीं के चाँद और मुश्क व अम्बर के जैसा कहा है।

एक लम्बी रेवायत में हज़रत इमाम-ए-जवाद अलैहिस्सलाम ने दसवें इमाम और वह रसूले ख़ुदा हज़रत मोहम्मद मुसतफ़ा सल्लल्लाहो अलैहे व आलेही वसल्लम से इमाम--ज़माना अज्जलल्लाहु फरजहुश्शरीफ के ज़हूर की घटना को बयान करते हैं, इस रेवायत में रसूले ख़ुदा ने ओबै इब्ने कॉब से यूँ फ़रमायाः

.........یخرج و جبرئیل عن یمنتہ و میکائیل عن یسرتہ، و سوف تذکرون ما اقول لکم و لو بعد حین و أفوّض أمری الی اللہ عزّوجلّ۔

یا ابیّ : طوبیٰ لمن لقیہ، و طوبیٰ لمن أحبّہ، و طوبی لمن قال بہ،ینجّیھم من الھلکۃ، و بالاقرار باللہ و برسولہ و بجمیع الأئمۃ، یفتح اللہ لھم الجنّۃ، مثلھم فی الأرض کمثل المسک الّذی یسطع ریحہ فلا یتغیّر أبداً،و مثلھم فی السماء کمثل القمر المنیر الّذی لا یطفأ نورہ ابداً

मेहदी (अज्जलल्लाहु फरजहुश्शरीफ) इस हाल में प्रकट होंगे कि उनके दायीं तरफ़ जिबरईल और बायीं ओर मीकाईल होंगे। और मैं तुम्हारे लिए एक चीज़ बयान कर रहा हूँ तुम उस को अवश्य ही याद करोगे, अगरचे यह एक लम्बे समय के बाद ही होगा। और मैं अपने सारे मोआमेलात ख़ुदा के हवाले करता हूँ।

ऐ ओबै !  सौभाग्य वाले हैं वह जो उनसे (यानी इमाम--ज़माना अज्जलल्लाहु फरजहुश्शरीफ) से मुलाक़ात करेंगे।

सौभाग्य वाले हैं वह जो उनसे मोहब्बत करें।

सौभाग्य वाले हैं वह जो यह विश्वास रखते हों कि इमाम--ज़माना अज्जलल्लाहु फरजहुश्शरीफ उसे हलाकत से बचाएँगे।

ख़ुदा को स्वीकार करने और इमामों की वेलायत को स्वीकार करने के कारण ख़ुदा इसके लिए स्वर्ग के दरवाज़े खोल देगा। धरती पर उस की मिसाल मुश्क (एक ख़ुशबू दार चीज़) जैसी है कि जिस की ख़ुश्बू तो फैलती है मगर वह कभी बदलती नहीं हैं। आकाश में उसके प्रकाश की मिसाल चाँद की तरह है कि जिसका नूर कभी ख़त्म नहीं होगा।(14)

ज़हूर के ज़माने के लोगों का चेहरा चौदहवी के चाँद की तरह चमकेगा जिससे मालूम होगा कि उनको आकाश से नूर दिया गया है। उनके सीनों में ईश्वर के मआरिफ़ का प्रकाश होगी जिसके कारण उनका चेहरा भी चमक जाएगा।

इमाम-ए-जवाद अलैहिस्सलाम ने इमाम-ए-जाफ़रे सादिक़ अलैहिस्सलाम से बयान किया है, आपने जनाबे इल्यास नबी से फ़रमायाः (जनाबे इल्यास उस चार नबियों में से एक हैं जो आज तक ज़िन्दा हैं और इमाम के ज़हूर के समय इमाम के साथ होंगे।)

فوددت أنّ عینیک تکون مع مھدی ھذہ الامۃ  ، والملائکۃ بسیوف آل داؤد بین السماء والأرض ،تعذّب أرواح الکفرۃ من الأموات،وتلحق بھم أرواح أشباھھم من الأحیاء ، ثمّ أخرج سیفاً ، ثم قال : ھا ! انّ ھذا منھا

मुझे पसंद है कि तुम्हारी आँखें उस उम्मत के मेहदी को देखें कि जब फ़रिश्ते दाऊद (एक नबी का नाम है) की तलवार से धरती और आसमान के बीच से जाने वाले काफ़िरों को सज़ा देते हैं और जिन्दा काफ़िरों को भी उनके पास (नर्क) में भेज देते हैं।(15)

फिर इमाम-ए-जाफ़रे सादिक़ अलैहिस्सलाम ने अपनी तलवार निकाला और फ़रमायाः

हाँ यह भी उन तलवारों में एक है। यह दृश्य कितना सुंदर होगा कि जब फ़रिश्ते अपनी तलवारों से काफ़िरों को नर्क में भेजेंगे।


(14) बेहारुल अनवारः 52/311

(15) बेहारुल अनवारः 46/364

 

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